माँ के प्यार का…कोई पैमाना नही

अक्सर घर पर रहने वाली माँ और नौकरीपेशा माँ की तुलना एक चर्चा का विषय रहता है । कुछ लोगों को लगता है कि घर पर रहने वाली माँ हमेशा बेहतर होती है और कुछ लोगों का ये मानना है कि नौकरीपेशा माँ घर और बाहर दोनों संभालती है तो वो एक बेहतर माँ होती है। 

लेकिन मेरा ये मानना है कि आप किसी भी माँ कि तुलना दूसरी माँ से नहीं कर सकते क्योंकि हर एक माँ अपने आप में कुछ खास होती है। हर माँ का सपना अपने बच्चों कि अच्छी परवरिश करना , उनके सपने पूूरे करना होता है। ऐसा कोई पैमाना नहीं बना दुनिया में जो एक माँ के प्यार को माप सके ।

शिखा, जो एक कंपनी में अच्छे पद पर कार्यरत थी लेकिन माँ बनते ही उसने अपनी नौकरी से त्यागपत्र देकर घर पर रहना चुना । ताकि वो अपने बच्चे कि भली भांति देखभाल कर सके ,वो अपने बच्चे में ही खुद के सपने को जीना चाहती थी तो वहीं दूसरी तरफ समीरा जिसने बच्चे के जन्म के बाद भी अपनी नौकरी को जारी रखा ताकि वो नौकरी करके अपने बच्चे के सपने पुरे कर सके।  दोनों माओं का प्यार अपने बच्चे के प्रति समान रूप से है, शिखा ने अपने बच्चे के लिए अपने सपनों को त्याग दिया वहीं दूसरी और समीरा ने अपने सपने को साथ रखकर अपने बच्चे कि परवरिश को चुना। इन दोनों की अपने बच्चे के प्रति प्यार की तुलना नहीं हो सकती । 

अगर कोई वर्किंग माँ है तो इसका ये कतई मतलब नहीं है के उसका अपने बच्चे के प्रति प्यार कम है । ये सच है कि उसे ज्यादा देर तक अपने बच्चे से दूर रहना पड़ता है लेकिन उस समय में भी कहीं ना कहीं उनके अंतर्मन में अपने बच्चे का क्रियाकलाप चलता रहता है। हर एक माँ चाहे वो अपने बच्चे के पास रहे, उनसे दूर रहे , घरेलू हो , कोई पदाधिकारी ,या फिर दूसरों के घर पर काम करने वाली महिला हर माँ अपने बच्चे के लिए कुछ खास होती है। हर माँ उनके सपनों को पूरा करने के लिए जी जान लगा देती है।

और अंत में हर माँ के लिए कुछ पंक्तियाँ..

क्या करोगे उन माओं के प्यार कि तुलना आपस में…

कोई घड़ी घड़ी संग रह कर उसमें खुद को जिए…

कोई ऑफिस की घड़ी देख देख उसके लिए जिए..

कोई सर पर रख ईंटों का गट्ठा और कमर पे बच्चे को लिए..

कोई कंधे पर लैपटॉप और मन में बच्चे को लिए..

कोई बैठ दूसरे देश देख वीडियो पर भीगी आँखों से मुस्काये…

 कोई तोड़ अपने सपनों को, बच्चों में सपने सजाये…

नहीं बना आज तक कोई ऐसा पैमाना.. जो एक माँ के प्यार को माप पाए…

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4 thoughts on “माँ के प्यार का…कोई पैमाना नही

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