तुम आते ही क्यों हो !

हाँ हाँ , बिल्क़ुल सही सुना तुमने तुम आते ही क्यों हो ! तुम्हे पता है पूरे सप्ताह तुम्हारा पलकें बिछाये इंतज़ार करती हूँ मैं की तुम कब आओगे | जब तुम आओगे तो मेरे लिए लाओगे खुशियों की सौगात, लेकिन तुम तो लेकर आ गए काम की बौछार!

अरे हाँ रविवार, तुमसे ही बातें कर रही हूँ मैं ! कितना इंतज़ार होता है इस दिन का के रविवार को तो पूरा आराम करेंगे, घूमने फिरने जायँगे, लेकिन जैसे ही ये रविवार आता है तो सब प्लान बदल जाते है| सोचते है चलो आज रविवार है तो कुछ एक्स्ट्रा काम भी निपटा दिए जाये। 

फिर शुरू होता है रविवार का दिन और साथ में थोड़े थोड़े एक्स्ट्रा कामों का सिलसिला| ये सब करते करते शाम ही हो चली और फिर जैसे ही मैंने अपने कमरे में प्रवेश किया तो एक आवाज सुनाई दी । अरे , जरा हमारी तरफ भी देख लो कब से बाट जोह रहे है तुम्हारी| पीछे मुड़ के देखा तो ये तो मेरी अलमारी की आवाज थी जो एड़ी उठाये मेरी तरफ बड़ी उम्मीद भरी निगहाओं से देख रही थी के आज लगे हाथों हमें भी सवांर ही दो ! मैंने हँसते हुए जवाब दिया करूंगी न तुम्हे अगले रविवार, ये सुनते ही मुँह फुला कर अलमारी बोली जाने दो तुम !!यही कहा था तुमने पिछले रविवार |ओह्ह ये सुनते ही मन पसीज गया मेरा भी और ना ना करते हुए भी उसकी भी सुननी ही पड़ी ।

तभी रविवार ने भी लगे हाथों अपने जाने का पैगाम दे ही दिया।

अरे , ये क्या अभी तो तुम आये थे और अभी जा रहे हो, मेरे सारे के सारे प्लान तो अधूरे रह गए | अगर इतनी जल्दी जाना होता है तो तुम आते ही क्यों हो। 

रविवार भी हँसते हुए बोला तुम फिर से रहनाअगले सप्ताह तैयार|ओह्ह रविवार कितने कठोर हो तुम!! लेकिन फिर भी मैैं करती हूँ तुमसे प्यार और चलो अगले सप्ताह फिर से करूंगी तुम्हारा इंतज़ार!!!!!

चित्र साभार : गूगल

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