सपनों की उड़ान – मेरी कहानी

मैं रेनू शर्मा..एकदम अल्हड मस्तमौला सी लड़की | मेरे जीवन में भी वही सब घटित हुआ जो हर आम भारतीय लड़की के साथ होता है ,पढ़ाई फिर शादी | शादी होते है हम होशियारपुर शिफ्ट हो गए | शादी का एक साल कैसे बीता पता ही नहीं चला | शादी को एक साल हुआ था और हमारी लाइफ में कृशव आ गया | कृशव मेरा बेटा..और सच कहूँ तो मेरी जान | लाइफ में सब सही चल रहा था बच्चे के साथ ही मेरा पूरा समय बीत जाता था | लेकिन कृशव के १ साल होने के बाद लगा के लाइफ में कुछ उद्देश्य नहीं रहा, और फिर मुझे लगा क्यों ना नौकरी ज्वाइन करूं | लेकिन बात वहीं आकर रुक जाती के कृशव को कौन संभालेगा | पति सुबह जाकर रात ८ बजे लौटते | समझ नहीं आ रहा था के क्या करूं |


शायद भगवान को कुछ और ही मंजूर था , पति ऑफिस की राजनीती और कुछ अवांछित तनाव के कारण नौकरी छोड़ देना चाहते थे | लेकिन ये बात परिवार को बताना उचित नहीं था , बस तब दोनों ने ही फैसला किया की क्यों ना अपना कुछ काम शुरू किया जाये | पहले मैं शुरू करती हूँ फिर पति भी साथ में जुड़ जायँगे और अपने काम के लिए तो घरवालों का स्पोर्ट मिल ही जायेगा| ये सोच कर हम अपने होमटाउन आ गए ,लेकिन कहते है ना जब मुसीबत आती है तो अपने भी साथ छोड़ देते है | कभी कभी ऐसा समय आता है के आपके साथ कोई खड़ा नहीं होता यहां तक की आपका परिवार भी और शायद हम ही वो बदनसीब थे |


जैसे तैसे पति ने मान मनुहार करके घर वालों को राजी कर लिया | हमने अबाकस इंस्टिट्यूट खोलने का फैसला लिया |मार्च 2016 में मैं अपने होमटाउन आ गयी |१ साल के लिए मुझे पति से दूर रहना था , लेकिन मुझे अब अपना सपना पूरा करना था , मेरे लिए , मेरे बच्चे के लिए और मेरे पति के लिए जिसने हर पल मेरा साथ दिया | और सबसे ज्यादा मेरे बच्चे ने , उस समय मेरा बेटा सिर्फ १.५ साल का था मुझे ट्रेनिंग के लिए ४-५ दिनों के लिए दिल्ली आना पड़ता था | कभी बस में कभी मेट्रो में मैं मेरे बेटे के साथ सफर करती थी | और आज भी मुझे मेरे परिवार के शब्द मेरे कानों में गूंजते है की कुछ नहीं रखा अपने काम में, पता नहीं कितने इंस्टिट्यूट खाली पड़े है , तुमसे नहीं होगा कुछ |


मेरा इंस्टिट्यूट शुरू हुआ , ८ बच्चों से शरुआत हुई , धीरे धीरे मेरी मेहनत रंग लाने लगी| स्टूडेंट्स बढ़ने लगे और आज मेरे इंस्टिट्यूट में १०० + स्टूडेंट्स है| मेरे इंस्टिट्यूट का नाम है , अच्छा रिजल्ट है , काफी स्कूलस के साथ इंस्टिट्यूट को जोड़ा जा रहा है | मेरे प्रति लोगों का सम्मान मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाता जा रहा है |


अंत में यही कहना चाहूंगी
कभी आस मत छोड़ो…मेहनत है लेकिन उसके बाद सफलता बाहयें फैलाये आपका इंतज़ार कर रही होती है |


धन्यवाद
रेनू शर्मा
Abacus & Handwriting
Trainer

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